ऐसा ही होता है…
क जिसको जितना संभालो..
उतना ही दूर चला वोह जाता है !
यकीन ना आये एक बार भी,
लेकिन ऐसा वाकया भी होता है…
रोता है कोई टूटकर तन्हाई में,
फिर भी दुनिया में वोह हस्त है …
लगता है जैसे मिटाई थी हस्ती,
सब जैसे अब हारा हुआ सा लगता है ..
जाने कितने वादे लिए-दिए,
छूटने पे सब बोझिल सा दीखता है…
ऐसा ही होता है..
क जिसको जितना संभालो,
उतना ही दूर चला वोह जाता है!
दे जाता है सिर्फ कुछ एहसास,
फिर सब कुछ पहले सा होता है.....
करता है कुछ शिकवा-शिकायत,
दिल, लेकिन फिर से शामिल दुनिया होता है..
ना थमेगी उसकी ज़िन्दगी,
ना यहाँ कुछ रुकता सा दीखता है…
मालूम है तुम संभल जाओगे,
दर्द तोह सिर्फ खोने का एक शायर को मिलता है ….!!!!!!!
मनीष कुमार तिवारी
9310259316
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