
उफ़ !!!!! ये रात।
और ये सन्नाटा ।
नींद नहीं आ रही है ।
बहुत दूर अपने देश ,
छोड़ परदेश में ।
एक खूबसुरत सा कमरा ।
पर! इतना उदासी क्यों ?
शायद मेरी निगाहें ।
किसी को तलाश रही है ।
कई दिनों से मिले नहीं ।
यकिनन वो तुम ही हो ...
तुम्हें भी पता है वो तुम हो ।
फिर ...
हुई क्या ?खता हमसे ।
जो तुम चुप-चुप हो ।
जो भी देना है सजा दे दो ।
अब इतना भी न खींचो ।
बहुत खीच लिया तुने ।
अब टूटने के कगार पे ,
आ पहुंची हूँ मैं ।
अबकी बार टूटी तो ।
कभी न जुड़ पाऊँगी मैं ।
मेरी तरसी हुइ आँखों में जो पल कुछ तुने दिये ।
मुझे पता है .......
तुम जिन्हे देखोगे तो कहोगे ,
उफ़ ! ये आँसू तुने कैसे पिये!!!!!!!!!!!!!
.........संध्या
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